नई दिल्ली, 20 जनवरी || डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) के CEO अमिताभ नाग के अनुसार, भारत जैसे भाषाई रूप से विविध देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सार्थक सार्वजनिक मूल्य देने के लिए, इसे मल्टीलिंगुअल और वॉइस-इनेबल्ड होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भाषा हेल्थकेयर सेवाओं तक पहुँचने में बाधा न बने।
नाग ने कहा कि लैंग्वेज AI नागरिकों की भागीदारी, शिकायत निवारण तंत्र, क्लिनिकल डॉक्यूमेंटेशन और डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्लेटफार्मों की समग्र पहुँच में काफी सुधार कर सकता है।
उन्होंने भुवनेश्वर में DIBD द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों, तकनीकी संस्थानों और कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य पहलों की प्रगति की समीक्षा करने और उन्हें अपनाने में तेजी लाने के लिए एक साथ आए।
नाग ने इस बात पर जोर दिया कि जैसे-जैसे डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ पूरे देश में फैलेंगी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाना एक स्वाभाविक प्रगति बन जाएगी।
एक मुख्य बात नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर करना था, ताकि NHA के डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों, जिसमें AB PM-JAY और ABDM शामिल हैं, में मल्टीलिंगुअल अनुवाद सेवाओं और AI-संचालित भाषा सहायता को सक्षम किया जा सके।