नई दिल्ली, 16 जनवरी || एक रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सड़कों को नया रूप देकर, बायोडायवर्सिटी की रक्षा करके और स्वदेशी डायग्नोस्टिक किट से हेल्थकेयर को बढ़ावा देकर भारत के वैज्ञानिक इकोसिस्टम को बदलने का काम किया है।
टाइम्स ऑफ ओमान ने बताया कि 2015 में, देश भर में CSIR की प्रयोगशालाओं ने ऐसे इनोवेशन डेवलप करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत किया, हेल्थकेयर के नतीजों में सुधार किया, क्लाइमेट रेज़िलिएंस को बढ़ाया और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मज़बूत किया।
रिपोर्ट में कहा गया है, "साल 2025 को भारत की वैज्ञानिक यात्रा में एक निर्णायक अध्याय के रूप में याद किया जाएगा -- एक ऐसा अध्याय जिसमें रिसर्च निर्णायक रूप से प्रयोगशालाओं से निकलकर राष्ट्रीय विकास के केंद्र में पहुँच गया।"
CSIR के तहत, उत्तर प्रदेश में 200 किलोमीटर से ज़्यादा ग्रामीण सड़कों को बेहतर बनाने के लिए ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया।
इस टेक्नोलॉजी से एमिशन कम हुआ और तेज़ी से और हर मौसम में कंस्ट्रक्शन संभव हुआ।