नई दिल्ली, 19 जनवरी || पहली बार हुई एक स्टडी में, ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स ने गायनेकोलॉजिकल कैंसर के रेडिएशन ट्रीटमेंट के दौरान स्टेबिलाइज्ड हाइल्यूरोनिक एसिड (sHA) जेल के इस्तेमाल की संभावना और सुरक्षा को दिखाया है।
यह जेल पहले से ही ऑस्ट्रेलिया के थेराप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा प्रोस्टेट कैंसर रेडिएशन ट्रीटमेंट में इस्तेमाल के लिए अप्रूव्ड है।
मोनाश यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के नेतृत्व वाली टीम ने पहली बार महिलाओं में हाइल्यूरोनिक एसिड जेल की जांच की। इसका मकसद MRI-गाइडेड ब्रैकीथेरेपी - जो एक तरह का इंटरनल रेडिएशन ट्रीटमेंट है - के दौरान ट्यूमर और रेक्टम के बीच धीरे-धीरे ज़्यादा जगह बनाना था।
यह जगह बनाकर, क्लिनिशियन का मकसद रेक्टम पर रेडिएशन के असर को कम करना था, ताकि रेडिएशन की ज़्यादा डोज़ ज़्यादा असरदार तरीके से ट्यूमर तक पहुँच सके, हेल्दी टिशू को नुकसान कम हो, और संभावित रूप से इलाज के नतीजे बेहतर हों।
मोनाश यूनिवर्सिटी की डॉ. कार्मिनिया लापुज़ ने कहा, "यह स्टडी गायनेकोलॉजिकल कैंसर के लिए ब्रैकीथेरेपी करवा रहे मरीजों के नतीजों को बेहतर बनाने में स्टेबिलाइज्ड हाइल्यूरोनिक एसिड (sHA) जेल की क्षमता का पता लगाने वाली दुनिया की पहली स्टडी है। हमारे नतीजों से पता चलता है कि यह प्रोसीजर सुरक्षित, संभव है, और इसमें अच्छे टेक्निकल फायदे हैं।"