नई दिल्ली, 20 जनवरी || इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) लखनऊ के रिसर्चर्स द्वारा मंगलवार को किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में स्थानीय सरकारी नेतृत्व में सकारात्मक कार्रवाई स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में काफी मदद कर सकती है, खासकर शिशु मृत्यु दर कम करने और गर्भवती महिलाओं की देखभाल में।
यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS) जर्नल में प्रकाशित हुआ है, और यह बताता है कि संरचनात्मक हस्तक्षेप लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और स्वास्थ्य असमानताओं को कैसे दूर कर सकते हैं।
निष्कर्षों से पता चला कि स्थानीय नेतृत्व में सकारात्मक कार्रवाई वाले गांवों में स्वास्थ्य परिणाम काफी बेहतर थे।
स्थानीय प्रतिनिधियों के नेतृत्व वाले गांवों में शिशु मृत्यु दर काफी कम थी।
मातृ स्वास्थ्य संकेतक भी बेहतर हुए, जिसमें दूसरी तिमाही तक कम से कम दो प्रसव पूर्व जांच, टिटनेस टीकाकरण और प्रसव पूर्व सप्लीमेंट्स मिलने की संभावना अधिक थी।
यूनिवर्सिटी के प्रो. के. जी. सहदेवन ने कहा, "हमारे अध्ययन में पाया गया कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों के स्थानीय नेताओं ने स्वास्थ्य और शिक्षा खर्च पर ऐसे फैसले लिए जो स्थानीय समुदायों में कुछ संरचनात्मक असमानताओं को दूर करते हैं।"