कोलकाता, 14 जनवरी || पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारी अलर्ट हो गए हैं, जिसके बाद केंद्र ने रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में मदद के लिए एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम भेजी है।
डॉक्टरों ने कहा कि निपाह वायरस दुर्लभ, अप्रत्याशित और जानलेवा हो सकता है।
बुधवार को उन्होंने कहा कि इसके प्रसार को रोकने के लिए जागरूकता और शुरुआती कार्रवाई बहुत ज़रूरी है।
डॉ. राकेश पंडित ने कहा कि निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकती है।
उन्होंने कहा, "फल खाने वाले चमगादड़ इस वायरस के प्राकृतिक वाहक हैं। लोग दूषित खाना खाने या संक्रमित व्यक्तियों के साथ करीबी शारीरिक संपर्क से संक्रमित हो सकते हैं।"
उन्होंने कहा, "पिछले प्रकोपों से पता चला है कि यह वायरस इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है, खासकर हेल्थकेयर और घरेलू माहौल में। बुखार और सांस की समस्याओं से लेकर न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं तक, यह बीमारी कई अलग-अलग रूप ले सकती है। ज़्यादा गंभीर मामलों में मरीज़ों को एन्सेफलाइटिस हो सकता है, जो दिमाग की एक संभावित जानलेवा सूजन है।"
डॉक्टरों ने बताया कि हालांकि निपाह कोविड-19 या इन्फ्लूएंजा जैसे हवा से फैलने वाले संक्रमणों की तरह तेज़ी से नहीं फैलता है, लेकिन करीबी और लंबे समय तक संपर्क वाली स्थितियों में यह बहुत ज़्यादा संक्रामक होता है।