नई दिल्ली, 9 जनवरी || एक स्टडी के अनुसार, दिन की रोशनी मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लोग बेहतर ग्लाइसेमिक कंट्रोल पा सकते हैं।
स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिनेवा (UNIGE) और नीदरलैंड की मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि जो लोग नेचुरल रोशनी में रहते थे, उनके ब्लड ग्लूकोज लेवल दिन में ज़्यादा घंटों तक नॉर्मल रेंज में रहते थे, और उनमें कम उतार-चढ़ाव होता था।
इसके अलावा, उनका मेलाटोनिन लेवल - यानी नींद का हार्मोन - शाम को थोड़ा ज़्यादा था, और फैट ऑक्सीडेटिव मेटाबॉलिज्म भी बेहतर हुआ था।
सेल मेटाबॉलिज्म जर्नल में पब्लिश हुई इस स्टडी में इस बीमारी वाले लोगों पर नेचुरल रोशनी के फायदेमंद असर का पहला सबूत मिला है।
UNIGE में एसोसिएट प्रोफेसर चार्ना डिबनर ने कहा, "यह कई सालों से पता है कि सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी मेटाबॉलिक डिसऑर्डर के डेवलपमेंट में एक बड़ी भूमिका निभाती है, जो पश्चिमी आबादी के बढ़ते हिस्से को प्रभावित कर रहा है।"
इस स्टडी के लिए, टीम ने 65 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 13 वॉलंटियर्स को शामिल किया, जिनमें सभी को टाइप 2 डायबिटीज़ थी।