नई दिल्ली, 9 जनवरी || एक स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान मां द्वारा एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बच्चों में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) बीमारी - जो एक आम बैक्टीरियल बीमारी है - होने का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि ये बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जेनिटल ट्रैक्ट में बिना नुकसान पहुंचाए रहते हैं, लेकिन ये गंभीर इन्फेक्शन पैदा कर सकते हैं, खासकर नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में, जिससे सेप्सिस, मेनिन्जाइटिस और निमोनिया हो सकता है।
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम की यूनिवर्सिटी ऑफ़ एंटवर्प की एक इंटरनेशनल टीम द्वारा की गई स्टडी में पता चला कि जन्म से पहले एंटीबायोटिक के संपर्क में आने से डिलीवरी के चार हफ़्ते के अंदर नवजात शिशुओं में GBS बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। तीसरी तिमाही की शुरुआत में संपर्क का सबसे ज़्यादा असर दिखा।
जर्नल ऑफ़ इन्फेक्शन में छपे पेपर में शोधकर्ताओं ने कहा, "जन्म से पहले एंटीबायोटिक के संपर्क में आने से डिलीवरी के बाद चार हफ़्ते के अंदर GBS का खतरा बढ़ सकता है, खासकर उन नवजात शिशुओं में जिन्हें रिस्क-बेस्ड इंट्रापार्टम प्रोफिलैक्सिस नहीं दिया गया है, और तीसरी तिमाही की शुरुआत संवेदनशीलता के लिए एक महत्वपूर्ण समय है।"
टीम ने 2006 से 2016 तक स्वीडन में सभी सिंगल जीवित जन्मों को शामिल करके एक जनसंख्या-आधारित कोहोर्ट स्टडी की, जिसमें नेशनल रजिस्टरों का इस्तेमाल किया गया।