नई दिल्ली, 23 फरवरी || सरकार के अनुसार, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, देश में अंग प्रत्यारोपण में चार गुना वृद्धि हुई है - 2013 में 5,000 से कम से बढ़कर 2025 में लगभग 20,000 हो गए हैं।
इसके अलावा, वर्तमान में लगभग 18 प्रतिशत प्रत्यारोपण मृत दाताओं द्वारा दान किए गए अंगों से किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर, 2023 से आधार-आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से मृत्यु के बाद अंग और ऊतक दान करने के लिए 4.8 लाख से अधिक नागरिकों ने पंजीकरण कराया है।
देश ने अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने देश भर में अंगदान, आवंटन और प्रत्यारोपण में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है।
मंत्रालय ने आगे बताया कि वर्ष 2025 में 1,200 से अधिक परिवारों ने अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके अंग दान करने के लिए आगे आए, जिससे हजारों लोगों की जान बच गई और कई अन्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
अब प्रत्येक दाता बहु-अंग दाता है, जिससे कई लोगों का जीवन बदल रहा है।
देश ने हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे जटिल अंग प्रत्यारोपण करने में दक्षता हासिल कर ली है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, “भारत हाथ प्रत्यारोपण में भी विश्व में अग्रणी है और किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक संख्या में हाथ प्रत्यारोपण करता है। ये उल्लेखनीय उपलब्धियां भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए मजबूत और निरंतर प्रोत्साहन को दर्शाती हैं, जो नीतिगत दृष्टिकोण को मापने योग्य, जीवन रक्षक परिणामों में परिवर्तित करती है।”