नई दिल्ली, 10 फरवरी || वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (एचटीए) पर पांच दिवसीय भारत-श्रीलंका कार्यशाला द्विपक्षीय स्वास्थ्य कूटनीति और एचटीए ज्ञान आदान-प्रदान में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मील का पत्थर है, जो क्षेत्रीय स्वास्थ्य पहलों को समर्थन देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
एचटीए पर ज्ञान आदान-प्रदान कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ सुषमा स्वराज भवन में हुआ, जिसकी मेजबानी स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से की।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य श्रीलंका में एचटीए को आगे बढ़ाने और संस्थागत रूप देने के लिए एक रणनीतिक मार्ग विकसित करना है।
डीएचआर के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, स्वास्थ्य एवं मानव संसाधन विभाग की अतिरिक्त सचिव अनु नागर ने भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में एचटीएइन (भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन) के प्रभावशाली योगदान पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि यह ज्ञान आदान-प्रदान श्रीलंका में एचटीए के संस्थागतकरण को लाभ पहुंचाएगा।