नई दिल्ली, 12 जनवरी || भारत में बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है, ऐसे में एक नई स्टडी से पता चला है कि स्कूल-आधारित बिहेवियरल इंटरवेंशन किशोरों में नमक और चीनी से भरपूर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPFs) की खपत को कम करने में कैसे मदद कर सकते हैं।
चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) के रिसर्चर्स के नेतृत्व में की गई साइंटिफिक स्टडी में पाया गया कि साधारण स्कूल-आधारित बिहेवियर प्रोग्राम रोज़ाना 1,000 कैलोरी से ज़्यादा जंक फूड की खपत को काफी कम कर सकते हैं।
फास्ट फूड और मीठे ड्रिंक्स सहित UPFs का ज़्यादा सेवन किशोरों और टीनएजर्स में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापा और कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला एक जाना-माना कारण है।
इंटरनेशनल जर्नल BMJ ग्लोबल हेल्थ में पब्लिश पेपर में, इंपीरियल कॉलेज लंदन, UK और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के रिसर्चर्स सहित अन्य ने कहा, "यह स्टडी भारतीय किशोरों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) की खपत को कम करने के लिए स्कूल-आधारित बिहेवियरल इंटरवेंशन की क्षमता को दिखाती है, जो कम और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में पब्लिक हेल्थ रिसर्च और प्रैक्टिस में एक महत्वपूर्ण कमी को पूरा करती है।"