अहमदाबाद, 24 फरवरी || दूसरे भारत-अमेरिकी रीढ़ सर्जरी शिविर के दौरान अहमदाबाद सिविल अस्पताल स्थित सरकारी स्पाइन इंस्टीट्यूट में रीढ़ की गंभीर विकृति से पीड़ित सात बच्चों की सफल सर्जरी की गई।
गुजरात सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस पहल में काइफोस्कोलिओसिस जैसी दुर्लभ बीमारियों के लिए उन्नत उपचार उपलब्ध कराया गया। काइफोस्कोलिओसिस एक ऐसी बीमारी है जो विश्व स्तर पर प्रति 1,000 बच्चों में से एक को प्रभावित करती है।
काइफोस्कोलिओसिस एक गंभीर स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी असामान्य रूप से मुड़ जाती है, जिससे अक्सर जानलेवा जोखिम पैदा होते हैं और जटिल सुधारात्मक सर्जरी की आवश्यकता होती है।
शिविर में मौजूद डॉक्टरों ने प्रक्रियाओं को अत्यंत जटिल बताया, जो आमतौर पर चार से पांच घंटे तक चलती हैं और इनमें प्रमुख नसों और रक्त वाहिकाओं के आसपास सावधानीपूर्वक काम करना शामिल होता है।
सर्जरी के दौरान निरंतर न्यूरो-मॉनिटरिंग महत्वपूर्ण थी, क्योंकि किसी भी त्रुटि के परिणामस्वरूप गंभीर चोट या पक्षाघात हो सकता था। एक अमेरिकी न्यूरो-मॉनिटरिंग टीम ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के साथ मिलकर रोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता की।
आर्थिक दृष्टि से, निजी अस्पतालों में इस तरह की प्रक्रियाओं पर पाँच से दस लाख रुपये का खर्च आता है, लेकिन सरकारी स्पाइन इंस्टीट्यूट में सभी सर्जरी निःशुल्क की गईं।
मरीजों में एक नौ वर्षीय बच्चा भी शामिल था, जिसकी 'ग्रोइंग रॉड सर्जरी' की गई, जिसका उद्देश्य रीढ़ की हड्डी को सीधा करना और भविष्य में होने वाली वृद्धि को समायोजित करना है।