नई दिल्ली, 20 फरवरी || सीमा सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण पाकिस्तान स्थित नशीले पदार्थों के गिरोह भारत में स्थानीय लोगों पर नशीले पदार्थों के उत्पादन और आपूर्ति के लिए भारी मात्रा में निर्भर हैं।
अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय उत्पादन पर निर्भरता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि सीमा के रास्ते भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी करना कठिन हो गया है।
पंजाब सीमा, जो हाल के वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी का पसंदीदा मार्ग थी, अब उसे पार करना भी कठिन हो गया है। पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की तस्करी करता रहा है, लेकिन अब सुरक्षा बढ़ा दिए जाने के कारण गिरोहों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है।
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि दाऊद सिंडिकेट ने भारत में अपने कई लोगों को सक्रिय कर दिया है और उन्हें स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों का उत्पादन करने के लिए कहा है।
भारत में दाऊद के लोग मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिलों और उससे सटे राजस्थान में पहले से मौजूद अफीम की खेती वाले क्षेत्र का उपयोग कर रहे हैं। आज इसी क्षेत्र का उपयोग एमडीएमए के निर्माण के लिए किया जाता है।
पिछले कुछ महीनों में इन इलाकों में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच से दाऊद से संबंध की ओर स्पष्ट संकेत मिले हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन गिरोहों ने बड़े पैमाने पर प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं जो भारी मात्रा में एमडीएमए का उत्पादन करने में सक्षम हैं।