नई दिल्ली, 12 फरवरी || गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उच्च मूल्य वाले उत्पादन की ओर क्रमिक बदलाव, बेहतर औद्योगिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी एवं औपचारिकीकरण के व्यापक उपयोग से भारत के विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में हाल की तिमाहियों में और मजबूती आई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सकल मूल्य वर्धित (जीवीएसी) में 7.72 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 9.13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 से पता चलता है कि मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग अब भारत के विनिर्माण मूल्य वर्धित में 46.3 प्रतिशत का योगदान करते हैं, जो अधिक परिष्कृत उत्पादन संरचना की ओर क्रमिक बदलाव का संकेत है।
बयान में कहा गया है, "इन लाभों को दर्शाते हुए, भारत की वैश्विक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में सुधार हुआ है, और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) सूचकांक में देश की रैंकिंग 2022 में 40वें स्थान से बढ़कर 2023 में 37वें स्थान पर पहुंच गई है।"
गौरतलब है कि सुधारों, क्षेत्रीय पहलों और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ, विनिर्माण क्षेत्र आज भारत की 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा के विकास का इंजन है।