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'खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत एक व्यवहार्य तीसरे ध्रुव के रूप में उभर रहा है'

नई दिल्ली, 11 फरवरी || वाशिंगटन स्थित ऑनलाइन प्रकाशन 'द नेशनल इंटरेस्ट' में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, अमेरिका, चीन और रूस द्वारा बनाए जा रहे शत्रुतापूर्ण विश्व में यूरोप और कनाडा के पास भारत के साथ संबंध मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

डॉ. जियानली यांग द्वारा लिखित लेख में कहा गया है, "चीन से जोखिम कम करने और अमेरिकी अस्थिरता से बचाव के बीच फंसा यूरोप, भारत को एक रणनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है। भारत चीन के भू-राजनीतिक और सैद्धांतिक बोझ के बिना व्यापक क्षमता प्रदान करता है। यह न तो अमेरिकी सुरक्षा कवच का विकल्प है और न ही चीन के विनिर्माण तंत्र की हूबहू नकल, लेकिन यह तेजी से खंडित हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक व्यवहार्य तीसरे ध्रुव का प्रतिनिधित्व करता है।"

लेख में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कनाडा भी यूरोप जैसी ही स्थिति का सामना कर रहा है। यह प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा चीन के साथ किए गए सतर्क संपर्क में परिलक्षित होता है, जिसका उद्देश्य साझेदारी में विविधता लाना और अमेरिका से होने वाले एकतरफा झटकों के जोखिम को कम करना है। साथ ही, वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए गुंजाइश भी है।

हाल के वर्षों में राजनयिक और सुरक्षा विवादों के कारण कनाडा-भारत संबंधों में तनाव के बावजूद, ओटावा व्यावहारिक रूप से यूरोप के मार्ग का अनुसरण कर सकता है और भारत को एक व्यावहारिक बचाव के रूप में मान सकता है।

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