पटना, 5 मार्च || बिहार में चल रहे गहन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
सत्ताधारी गठबंधन के नितिन नवीन, शिवेश कुमार राम और उपेंद्र कुशवाहा समेत सभी पांचों उम्मीदवारों ने एक ही दिन अपना नामांकन पत्र जमा किया।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान कई वरिष्ठ एनडीए नेता मौजूद थे, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे, जो इस अवसर पर नई दिल्ली से पटना पहुंचे थे।
जहां नीतीश कुमार के लिए यह नामांकन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव था, वहीं इस घटनाक्रम ने जनता दल (यूनाइटेड) के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा कर दिया।
प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री के आवास के बाहर जमा हो गए और भाजपा के खिलाफ नारे लगाते हुए नीतीश कुमार को दरकिनार करने की साजिश का आरोप लगाया।
जब अमित शाह नीतीश कुमार के साथ आवास से निकले, तो कुछ जेडीयू कार्यकर्ताओं ने "अमित शाह मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाए और भाजपा पर 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए पार्टी को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
इससे पहले, बिहार सरकार में भाजपा के एक मंत्री को विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा और हंगामे के बीच उन्हें इलाका छोड़ना पड़ा।
कुछ जेडीयू समर्थकों ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार पर राष्ट्रीय राजनीति में आने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उनका दावा है कि नीतीश कुमार के नाम पर विधानसभा चुनाव लड़े जाने के बावजूद भाजपा बिहार में प्रत्यक्ष नेतृत्व हासिल करना चाहती है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जनभावना नेतृत्व परिवर्तन के खिलाफ है और आरोप लगाया कि भाजपा ने नीतीश कुमार को हटाने की योजना पहले ही बना ली है।