शिमला, 10 फरवरी || हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) वापस लेने के बावजूद पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और विभिन्न जन कल्याणकारी पहलों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जोर देकर कहा कि सरकार अपने संसाधनों को जुटाकर इन योजनाओं को जारी रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि लोगों के हक हर हाल में सुरक्षित रहें।
विपक्ष के रुख का खंडन करते हुए मुख्यमंत्री ने यहां मीडिया से कहा कि अगर भाजपा सत्ता में होती, तो वे ओपीएस को एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) से बदल देते, जिससे सरकारी कर्मचारियों को वर्तमान में मिल रही सुरक्षा प्रभावी रूप से समाप्त हो जाती।
एक सामान्य परिवार से होने के कारण, उन्होंने जनता की चिंताओं को गहराई से समझा और आश्वासन दिया कि उनका प्रशासन उनके हितों से कभी समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि वित्त विभाग राज्य की वित्तीय स्थिति की तकनीकी बारीकियों का प्रबंधन करता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता राज्य को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों को बढ़ाना बनी हुई है।