नई दिल्ली, 31 जनवरी || वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी में हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस वर्ष रक्षा, अवसंरचना, पूंजीगत व्यय, बिजली और किफायती आवास में उच्च वृद्धि पर जोर दिया जाएगा, साथ ही सामाजिक कल्याण और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, नीति निर्माता वैश्विक अनिश्चितता के बीच विकास प्राथमिकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।
बजट में विकास की गति को बनाए रखने और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण को बरकरार रखने के बीच कुशल संतुलन स्थापित करने की संभावना है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बजट को अभूतपूर्व भू-राजनीतिक उथल-पुथल से उत्पन्न अल्पकालिक चुनौतियों का भी समाधान करना होगा।
सरकार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के पथ पर दृढ़ है, जिसके चलते राजकोषीय घाटा कोविड संकट के कारण बढ़े 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर से घटकर वित्त वर्ष 2026 के अंत (अनुमानित) के लिए 4.4 प्रतिशत हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार अपने "राजकोषीय अनुशासन" को काफी हद तक बरकरार रखेगी और इस पथ से किसी बड़े विचलन की उम्मीद नहीं है।