मुंबई, 31 जनवरी || वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारतीय शेयर बाजारों में इस सप्ताह लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र रहे, लेकिन बाजार में सतर्कतापूर्ण सकारात्मक रुख देखने को मिला।
केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले सप्ताह के अंत में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर पड़ गई। विदेशी निवेशकों (FII) की निरंतर निकासी और रुपये के अवमूल्यन के कारण बाजार में अस्थिरता फिर से उभर आई, जिसके चलते अंतिम कारोबारी सत्र में नुकसान हुआ।
निफ्टी में सप्ताह के दौरान 1.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन अंतिम कारोबारी दिन 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 25,320 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 296 अंक या 0.36 प्रतिशत गिरकर 81,537 पर बंद हुआ। सप्ताह के दौरान इसमें 0.90 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
इस सप्ताह क्षेत्रीय सूचकांकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। विविध उपभोक्ता सेवा और हार्डवेयर प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिनमें 2.5 से 3.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। FMCG, मीडिया और सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
धातु और तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयर इस सप्ताह के शीर्ष लाभकर्ताओं में शामिल रहे, जिनमें 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि, निफ्टी धातु सूचकांक अंतिम कारोबार सत्र में 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया। विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर के मजबूत होने, वैश्विक तरलता संबंधी चिंताओं और फेड के आगामी अध्यक्ष को लेकर बढ़ती सतर्कता के कारण आईटी क्षेत्र में भी मुनाफावसूली तेज हो गई।