नई दिल्ली, 29 जनवरी || सरकार ने गुरुवार को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा कि बच्चों और युवाओं में डिजिटल लत एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रही है और देश में मानसिक स्वास्थ्य संकट में भी योगदान दे रही है।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि डिजिटल लत देश के युवाओं के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ी हुई है।
सर्वेक्षण में कहा गया है, "डिजिटल लत ध्यान भटकाने, नींद की कमी और एकाग्रता में कमी के कारण शैक्षणिक प्रदर्शन और कार्यस्थल उत्पादकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। यह सामाजिक पूंजी को भी नष्ट करती है।"
इस समस्या से निपटने के लिए, सीबीएसई ने स्कूलों और स्कूल बसों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अन्य उपायों में शिक्षा मंत्रालय का 'प्रज्ञात' ढांचा शामिल है, जो स्क्रीन टाइम पर ध्यान देते हुए डिजिटल शिक्षा नियोजन का मार्गदर्शन करता है, और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के स्क्रीन टाइम सीमा और ऑनलाइन सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश भी शामिल हैं।
इसके अलावा, सर्वेक्षण में 15-24 आयु वर्ग के लोगों में सोशल मीडिया की लत की उच्च व्यापकता का भी उल्लेख किया गया है, जो चिंता, अवसाद, कम आत्मसम्मान और साइबरबुलिंग तनाव से दृढ़ता से जुड़ी हुई है।