नई दिल्ली, 28 जनवरी || केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को नई औषधि एवं नैदानिक परीक्षण (एनडीसीटी) नियम, 2019 में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किए, जिनसे दवा विकास की समयसीमा कम करने के साथ-साथ नैदानिक अनुसंधान और दवा विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
इन संशोधनों का उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुमोदन की समयसीमा कम करना और व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देना है।
नियामक सुधार हितधारकों को पर्याप्त लाभ प्रदान करेंगे, साथ ही जन स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और अनुसंधान उद्देश्यों के लिए दवाओं के जैव उपलब्धता/जैव समतुल्यता (बीए/बीई) अध्ययन, परीक्षण और जांच को शीघ्रता से शुरू करने में सुविधा प्रदान करेंगे, तथा दवा विकास और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करेंगे।
मंत्रालय ने कहा, “ये उपाय जन विश्वास सिद्धांत और व्यापक व्यापार करने में सुगमता ढांचे के अनुरूप, दवा क्षेत्र में निरंतर, विश्वास-आधारित नियामक सुधारों के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।”
इसमें आगे कहा गया है, "इस पहल का उद्देश्य भारतीय दवा उद्योग के अनुसंधान एवं विकास-आधारित विकास को बढ़ावा देना, घरेलू नियमों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना और दवा अनुसंधान एवं विकास के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।"