नई दिल्ली, 5 फरवरी || प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे की उम्र पर की गई टिप्पणी - जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यसभा में विपक्ष के 83 वर्षीय नेता को बैठे-बैठे नारे लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए - ने संसद में दोपहर के हंगामेदार माहौल की नींव रख दी।
अपनी विशिष्ट तीक्ष्णता के साथ की गई इस टिप्पणी पर विपक्ष के सदस्यों ने तुरंत हमला बोला, जो पहले से ही सदन में नारेबाजी कर रहे थे।
उन्होंने इसे खर्गे की वरिष्ठता और शारीरिक स्थिति पर कटाक्ष के रूप में समझा।
इसके बाद विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हो गया और सदन नारों और व्यवधानों के रंगमंच में बदल गया।
गुरुवार को राज्यसभा में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए उठे।
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सदस्यों ने "तानाशाही नहीं, इंदिरा जी का अपमान नहीं सहेंगे" और "विपक्ष के नेता को बोलने दो" के नारे लगाते हुए समन्वित नारेबाजी की और मांग की कि राहुल गांधी को लोकसभा में बिना किसी रोक-टोक के बोलने की अनुमति दी जाए।