नई दिल्ली, 26 जनवरी || एसबीआई रिसर्च की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स के दम पर एक उज्ज्वल देश बना हुआ है और वित्त वर्ष 2027 में सरकारी पूंजीगत व्यय 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि है।
बजट गणना के लिए प्रासंगिक नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10.5-11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसमें वैश्विक कमोडिटी कीमतों में तेजी से विश्व सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में वृद्धि हो सकती है।
नाममात्र वृद्धि में थोड़ी धीमी गति से वित्त वर्ष 2027 में कर राजस्व प्रभावित हो सकता है, जिसके लिए बेहतर व्यय योजना की आवश्यकता होगी। हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा कि जीएसटी युक्तिकरण और व्यक्तिगत आयकर के सीमांत कर दरों में कमी से कर आधार में सुस्ती के प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।
उपरोक्त नाममात्र पूर्वानुमान के आधार पर, वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। घोष ने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2027 में सरकार से उधार लेने की लागत 6.8-7.0 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसमें जोखिम संतुलित रहेगा।