जयपुर, 26 जनवरी || पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी पर हालिया बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से विशेष अभियान समूह (एसओजी) द्वारा की जा रही निष्पक्ष और सुचारू जांच प्रभावित हो सकती है।
अशोक गहलोत ने कहा कि जब जांच अभी जारी है, तब मुख्यमंत्री के लिए ऐसे बयान देना अनुचित है जिनसे जांच के नतीजे का पूर्वाभास होता प्रतीत हो।
उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री शर्मा ने किस आधार पर दावा किया कि अनियमितताएं एक विशेष अवधि तक सीमित थीं, जबकि एसओजी ने संकेत दिया है कि ओएमआर शीट में हेराफेरी लगभग 11 वर्षों से हो रही थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि आरोपी अलग-अलग सरकारों में एक ही पद पर रहे हैं, तो जांच को केवल एक कार्यकाल तक सीमित रखना तर्कहीन होगा।
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि क्या मौजूदा सरकार को सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट देने से जांच अधिकारियों पर अनुचित दबाव पड़ सकता है और जांच के दायरे पर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा, "एसओजी के निष्कर्षों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों के राजनीतिक बयान जांच की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकते हैं और जनता, विशेषकर युवाओं के मन में संदेह पैदा कर सकते हैं।"