नई दिल्ली, 12 मार्च || वैश्विक वित्तीय सेवा फर्म नोमुरा ने अनुमान लगाया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में 7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।
हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने अपने पहले के वृद्धि अनुमान में थोड़ी कटौती की है और चेतावनी दी है कि क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से मुद्रास्फीति और देश के बाह्य संतुलन पर दबाव पड़ सकता है।
नोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा और अर्थशास्त्री औरोदीप नंदी द्वारा लिखित रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में ऊर्जा की लागत बढ़ रही है। ईंधन की ऊंची कीमतें भारत सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं।
नोमुरा ने वित्त वर्ष 2027 में भारत के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को पहले के 3.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया है। फर्म का अनुमान है कि भारत का चालू खाता घाटा (सीए) सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.6 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जो पिछले अनुमानों से 0.4 प्रतिशत अंक अधिक है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में उपभोग और औद्योगिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, निर्यात और सरकारी खर्च कमजोर दिख रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा की कमी, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में व्यवधान, देश में औद्योगिक और सेवा गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।
इन जोखिमों के बावजूद, नोमुरा का मानना है कि भारत में चक्रीय आर्थिक सुधार जारी रहेगा, जिसे पिछली नीतिगत ढील, संरचनात्मक सुधारों, बढ़ती मजदूरी और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी का समर्थन प्राप्त होगा।