नई दिल्ली, 28 फरवरी || शनिवार को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की संशोधित जीडीपी श्रृंखला न केवल एक बड़े आर्थिक आधार को दर्शाती है, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती मजबूती को भी एक प्रमुख विकास चालक के रूप में उजागर करती है, हालांकि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में विकास दर घटकर 7.8 प्रतिशत रह गई।
एसबीआई रिसर्च द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि दर दूसरी तिमाही के 8.4 प्रतिशत से घटकर 7.8 प्रतिशत हो गई।
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 के पूरे वर्ष के लिए विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पुरानी श्रृंखला के तहत अनुमानित 7.4 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है।
एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि कुछ वार्षिक विकास आंकड़ों में संशोधन किया गया है, लेकिन बेहतर डेटा कवरेज और उन्नत कार्यप्रणाली के कारण नए आधार वर्ष में अर्थव्यवस्था का आकार काफी बढ़ गया है।
वित्त वर्ष 2024 के विकास अनुमान को पहले के 9.2 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025 के विकास अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक जीडीपी के स्तर में भारी उछाल आया है। वित्त वर्ष 2023 की वास्तविक जीडीपी 261 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि पुरानी 2011-12 श्रृंखला में यह 161 लाख करोड़ रुपये थी।
इसी प्रकार, वित्त वर्ष 2025 की वास्तविक जीडीपी को पहले के 188 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रिपोर्ट में इस वृद्धि का कारण बेहतर कवरेज, विनिर्माण क्षेत्र में दोहरी अपस्फीति का उपयोग और अधिक विस्तृत मूल्य सूचकांकों को बताया गया है।