चंडीगढ़, 10 फ़रवरी
दिनांक 9–10 फ़रवरी 2026 को डी.ए.वी. कॉलेज, सेक्टर–10, चंडीगढ़ के पंजाबी विभाग द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला “सिनेमा और स्क्रिप्ट राइटिंग” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सिनेमा में स्क्रिप्ट लेखन की महत्वपूर्ण भूमिका से परिचित कराना था।
कार्यशाला के पहले दिन विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि कहानी से दृश्य (सीन) किस प्रकार तैयार किए जाते हैं, घटनाओं का चयन कैसे किया जाता है तथा कहानी का समय—भूतकाल, वर्तमान या भविष्य—पात्रों के संवादों और दृश्यों के माध्यम से किस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है।
दूसरे दिन कैमरे के उपयोग की तकनीक और दृश्य संरचना (विज़ुअल कंपोज़िशन) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. राजीव शर्मा, जो कि नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित हैं, ने विद्यार्थियों को अभ्यासात्मक तरीके से स्क्रिप्ट लेखन का प्रशिक्षण दिया।
विभागाध्यक्ष डॉ. मनदीप कुमार ने फिल्म और सिनेमा से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे भविष्य में स्क्रिप्ट लेखन को एक संभावित पेशे के रूप में अपना सकते हैं। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. मोना नारंग ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए स्वागत भाषण दिया और आयोजन की अनुमति प्रदान की।
कार्यशाला के दौरान डॉ. रजिंदर सिंह भी उपस्थित रहे। डॉ. रमा कुमारी ने वर्ष 1913 में आई.सी. नंदा द्वारा समाज सुधार के उद्देश्य से लिखित नाटक “दुल्हन” की स्क्रिप्ट का संदर्भ देते हुए, सवा सौ वर्षों बाद आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से सोच में आए परिवर्तनों तथा स्क्रिप्ट लेखन द्वारा उत्पन्न आर्थिक संभावनाओं के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।
दो दिवसीय कार्यशाला का समापन डॉ. हरजीत सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया। प्रोफेसर पवनदीप कौर ने मंच संचालन कुशलतापूर्वक किया। डॉ. जसप्रीत कौर और प्रो. मनवीर कौर ने विद्यार्थियों को कहानी और संवाद लेखन में सहयोग प्रदान करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया।
इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि वैश्वीकरण के इस दौर में पंजाबी भाषा के माध्यम से स्क्रिप्ट लेखन जैसे नए और रचनात्मक पेशों से किस प्रकार जुड़ा जा सकता है।
इस कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि विद्यार्थियों ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त सैद्धांतिक एवं अभ्यासात्मक ज्ञान के आधार पर अपनी लघु डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में तैयार कीं और मौलिक स्क्रिप्टें लिखीं। विद्यार्थियों ने सामाजिक, सांस्कृतिक तथा समकालीन विषयों पर कहानियाँ रचकर उन्हें स्क्रिप्ट के रूप में रूपांतरित किया, जिससे उनकी रचनात्मकता और प्रयोगशील सोच को नया आयाम मिला। यह अभ्यास विद्यार्थियों के लिए सिनेमा और स्क्रिप्ट लेखन के क्षेत्र में हाथों-हाथ सीखने का एक महत्वपूर्ण अनुभव सिद्ध हुआ।