नई दिल्ली, 29 जनवरी || गुरुवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2025 में 135.4 अरब डॉलर के प्रेषण प्रवाह के साथ विश्व में प्रेषण का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है, जिससे बाह्य मुद्रा खाते में स्थिरता बनी हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत सर्वेक्षण में कहा गया है कि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से प्रेषण का हिस्सा बढ़ा है, जो कुशल और पेशेवर श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विनिर्माण लागत को कम करने के लिए एकीकृत प्रयास आवश्यक हैं।
इसके अलावा, अनुशासित, उत्पादकता-उन्मुख औद्योगिक नीति, मूल्य श्रृंखलाओं में इनपुट लागतों के सावधानीपूर्वक प्रबंधन और उच्च-मूल्य वाली सेवाओं के पूरक विकास द्वारा समर्थित विनिर्माण निर्यात क्षमता में वृद्धि से स्थायी बाह्य लचीलापन और मजबूत मुद्रा विश्वसनीयता प्राप्त हो सकती है।
वैश्विक वित्तीय स्थितियों में सख्ती के बावजूद, भारत ने लगातार पर्याप्त सकल निवेश प्रवाह आकर्षित किया है, जो वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी का 18.5 प्रतिशत था।
UNCTAD के आंकड़ों के अनुसार, भारत दक्षिण एशिया में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना रहा और इसने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों को पीछे छोड़ दिया।