नई दिल्ली, 28 जनवरी || भारत के हालिया सांख्यिकी सुधार प्रासंगिकता, जवाबदेही और विश्वसनीयता की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जीडीपी, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार वर्षों को अद्यतन करके, अनौपचारिक और सेवा क्षेत्रों के मापन को सुदृढ़ करके और श्रम सांख्यिकी में परिवर्तन करके, सरकार ने आधिकारिक आंकड़ों को आज की अर्थव्यवस्था की संरचना और गतिशीलता के साथ अधिक निकटता से संरेखित किया है।
साथ ही, आंकड़ों की गुणवत्ता, समयबद्धता और सार्वजनिक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं। बयान में कहा गया है कि नई श्रृंखलाओं और प्रणालियों का समन्वित कार्यान्वयन न केवल कार्यप्रणाली की सटीकता और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि पारदर्शिता और हितधारकों की सहभागिता को भी दर्शाता है।
इन उपायों के अंतर्गत, नई आर्थिक संरचनाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए जीडीपी अनुमानों का आधार वर्ष 2022-23 कर दिया गया है, और सीपीआई का आधार वर्ष 2024 कर दिया गया है, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों परिवारों के लिए उपभोग बास्केट और भार को अद्यतन किया गया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के नए स्वरूप के अनुरूप, आईआईपी को 2022-23 के लिए संशोधित किया जा रहा है।