कोलकाता, 15 जनवरी || भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर चल रही सुनवाई में हिस्सा लेने वाले "अनमैप्ड" वोटरों द्वारा दिए गए पहचान दस्तावेजों के वेरिफिकेशन की धीमी गति को लेकर चिंतित है।
इस स्थिति के बीच, आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट (DM), जो जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) भी हैं, को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया में तेज़ी लाने का निर्देश दिया है, क्योंकि इस साल 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने की आखिरी तारीख है।
फिलहाल, "अनमैप्ड वोटरों" की सुनवाई चल रही है, यानी ऐसे वोटर जो "सेल्फ-मैपिंग" या "वंश-मैपिंग" के ज़रिए 2002 की वोटर लिस्ट से अपना नाम नहीं जोड़ पाए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), पश्चिम बंगाल के कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार, 32 लाख अनमैप्ड वोटरों में से बुधवार शाम तक लगभग 29 लाख वोटरों की सुनवाई पूरी हो चुकी है।
हालांकि, जिन 29 लाख वोटरों की सुनवाई प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें से उसी समय तक सिर्फ़ लगभग 11 लाख वोटरों के सहायक पहचान दस्तावेजों को सुनवाई सत्र में सिस्टम में अपलोड किया गया है।