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यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद प्रचलन में मुद्रा का आंकड़ा रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा: रिपोर्ट

मुंबई, 16 फरवरी || सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रचलन में मुद्रा (सीआईसी) जनवरी 2026 के अंत तक लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसकी वार्षिक वृद्धि दर पिछले वर्ष के 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 11.1 प्रतिशत हो गई है।

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि के आधार पर (वर्ष-दर-वर्ष), जनता के पास मौजूद मुद्रा (सीडब्ल्यूपी), जो प्रचलन में मौजूद मुद्रा का 97.6 प्रतिशत है, लगभग 39 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसी अवधि में सीआईसी में 2.76 लाख करोड़ रुपये या 3.11 गुना की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मौजूदा रुझानों के अनुसार, जनता के पास मौजूद मुद्रा, महामारी के बाद वित्त वर्ष 2021 की 4.6 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि को पार कर सकती है।

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि "भारत में यूपीआई लेनदेन का मूल्य मुद्रा प्रचलन से कहीं अधिक है"। एक माह के यूपीआई लेनदेन का मूल्य लगभग 28 लाख करोड़ रुपये रहा, जो अर्थव्यवस्था के कुल मुद्रा भंडार का लगभग 70 प्रतिशत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल भुगतान की मात्रा नकदी की तुलना में कहीं अधिक है।

नकदी-से-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2021 के 14.4 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 11 प्रतिशत हो गया है।

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