नई दिल्ली, 4 फरवरी || बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बजट 2026-27 ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और नीतिगत प्राथमिकताओं से जुड़े क्षेत्रों के लिए मध्यम अवधि की आय की स्पष्टता को मजबूत किया है, हालांकि आय में सुधार में समय लगेगा।
छोटे निवेश प्रबंधकों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट ने रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र, विनिर्माण से जुड़े व्यवसायों, रसद, चुनिंदा ऑटो और सहायक उद्योगों, ऊर्जा संक्रमण विषयों और नवाचार आधारित फार्मास्यूटिकल्स में "कार्रवाई योग्य अवसर" खोले हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डेरिवेटिव कराधान में बदलाव जैसे चुनिंदा उपायों पर बाजार की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और यह तर्क दिया गया कि बजट के गहरे संकेत पूंजी निर्माण, रणनीतिक विनिर्माण और रक्षा-आधारित विस्तार में निरंतरता की ओर इशारा करते हैं।
निवेश मंच ने हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को एक सकारात्मक विकास बताया और कहा कि तेल और गैस, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, दुर्लभ पृथ्वी धातुएं, डेटा केंद्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस समझौते से लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्र हैं।
स्मॉलकेस मैनेजर और ग्रीन पोर्टफोलियो के सीईओ और सह-संस्थापक दिवम शर्मा ने कहा कि कई निवेशक "कमजोर कमाई और सुस्त भावना के अपने पहले लंबे दौर" का अनुभव कर रहे हैं।