नई दिल्ली, 7 जनवरी || बिजनेस चैंबर PHDCCI ने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए अपनी विशलिस्ट में, MSME सेक्टर के लिए लागत कम करने के लिए कम ब्याज दरों पर फाइनेंस तक आसान पहुंच और रेगुलेटरी बोझ में कमी की मांग की है, जो अर्थव्यवस्था में ग्रोथ और रोज़गार पैदा कर रहा है।
PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, माइक्रो, मीडियम और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSMEs) भारत की अर्थव्यवस्था को 10 प्रतिशत ग्रोथ के रास्ते पर ले जाने की कुंजी हैं।
देश में मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और रोज़गार पैदा करने में MSME सेक्टर का योगदान बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसमें कहा गया है कि 2025 में, इस सेक्टर ने मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में 30 प्रतिशत का योगदान दिया और यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार देने वाला सेक्टर बनकर उभरा है।
बयान में कहा गया है कि जुलाई 2020 से दिसंबर 2025 तक 7.30 करोड़ से ज़्यादा छोटे और माइक्रो एंटरप्राइजेज ने उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) पर रजिस्ट्रेशन कराया है, जिससे वे संगठित क्षेत्र के दायरे में आ गए हैं। यह ट्रेंड एक व्यवस्थित तरीके से टारगेटेड नीतियों और योजनाओं को शुरू करने की कुंजी है।